Monday, December 27, 2010

वायदा कारोबार से शकर होगी कड़वी

केन्द्र सरकार ने 5 लाख टन शकर के निर्यात को हरी झंडी दे है। इस फैसले का मकसद अंतराष्ट्रीय बाजार में शकर के बढ़ते भावों का फायदा उठाना है, लेकिन इस निर्णय के बाद चीनी के दाम में तत्काल इजाफा हो गया। अब सोमवार से 19 महीनों बाद राजधानी सहित देश के अन्य हिस्सों में इसका वायदा कारोबार फिर शुरु हो गया है। ऐसे में शकर फिर कड़वी होने का अंदेशा है। पहले ही महंगाई की मार से त्रस्त जनता के लिए यह एक और झटका होगा।
उल्लेखनीय है कि दो साल पहले भी शकर के आसमानी भावों ने आम लोगों को हलकान कर दिया था। शकर का वायदा बाजार शुरु होते ही इसके दाम 45 रु. किलो तक जा पहुँचे थे। भारी आलोचना और हंगामें के बाद सरकार ने मई 2009 में शक्कर के वायदा कारोबार पर रोक लगा दी थी। लेकिन अब वायदा बाजार आयोग (एफसीसी) ने शकर की खरीद बिक्री को औपचारिक मंजूरी दे दी है। सूत्रों के अनुसार यह अनुमति चीनी के बेहतर उत्पादन की संभावना को देखते हुए दी गई है। उद्योग जगत को इस साल 2 करोड़ 55 लाख टन शकर पैदावार की उम्मीद है। जबकि सरकारी अनुमान 2 करोड़ 45 लाख टन का बताया जा रहा है। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज का अनुमान है कि 2010-11 में देश में गन्ना उत्पादन 10 प्रतिशत बढ़कर करीब 30 करोड़ टन पहुँच जाएगा। वर्ष 2009-10 में 27.4 करोड़ टन गन्नाा उपजाया गया था।

उधर, विशेषज्ञों का मानना है कि शकर के निर्यात और वायदा कारोबार शुरू होने के साथ ही शकर के दाम फिर आसमान पर चले जाएँगे। उदाहरण के लिए 1 दिसंबर 2010 को शकर 29 रु.किलो बिक रही थी, लेकिन 20 दिसंबर को केन्द्रीय कृषि मंत्री का बयान आते ही शकर के दाम अब 34 रु. किलो हो गए। हमे याद रखना होगा कि यह वायदा कारोबार ही था, जिसके कारण 2006 में 12 रुपए किलो बिकने वाली चीनी के दाम चालीस पार चले गए थे।

यह भी एक घोटाला है
अर्थशास्त्री डॉ. आरएस तिवारी कहते हैं कि शकर मिलों और केन्द्रीय मंत्री शरद पवार का रिश्ता किसी से छिपा नहीं है। चीनी को वायदा कारोबार में शामिल करने से जनता का फायदा नहीं होने वाला। आवश्यक वस्तुओं को वायदा कारोबार में शामिल करना दरअसल एक तरह का आर्थिक घोटाला ही है।

डिलीवरी आधारित हो कारोबार
कल्पतरू इंवेस्टर्स के आदित्य जैन मनयां कहते हैं कि सरकार को शकर मिल मालिकों और किसानों को फायदा देना और कीमतों पर लगाम रखना है तो शकर मिल मालिकों और किसानों को फायदा देना और कीमतों पर भी लगाम रखना है तो उसे शकर सहित आवश्यक वस्तुओं का वायदा कारोबार डिलीवरी आधारित करना चाहिए। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में ऐसा होता है।