Friday, July 23, 2010

बलि ले रहा है सूचना का अधिकार

सात माह में छह कार्यकर्ताओं की हत्या, छह पर हमले
महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 3 की ली जान

सूचना का अधिकार (आरटीआई) भले ही भ्रष्टाचार के खिलाफ ब्रह्मास्त्र कहा जाता हो, लेकिन यह आरटीआई कार्यकर्ताओं की बलि लेने लगा है। ये कार्यकर्ता भ्रष्टाचारियों और माफिया के निशाने पर हैं। यही वजह है कि पिछले सात माह में देश में 6 आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई और इतने ही स्थानों पर जानलेवा हमले हुए। मारे गए कार्यकर्ताओं में 3 महाराष्ट्र, 2 गुजरात और 1 बिहार से हैं।

देश में 2005 में लागू हुआ सूचना का अधिकार से भ्रष्टाचारी बौखला गए हैं। लिहाजा वे पोल खुलने की डर से अब सामाजिक कार्यकर्ताओं की जान लेने से भी नहीं चूक रहे हैं। पिछले मंगलवार को अहमदाबाद उच्च न्यायालय के बाहर हुई सामाजिक कार्यकर्ता अमित जेठवा की हत्या इस बात का ताजा सबूत है। इस अधिकार का इस्तेमाल करने के कारण इस साल श्री जेठवा सहित छह कार्यकर्ता जान गँवा बैठे हैं। ये सभी कार्यकर्ता भू माफिया के साथ शासन-प्रशासन के भ्रष्टाचारियों की पोल खोलने में लगे हुए थे। गौरतलब है कि श्री जेठवा ने जूनागढ़ के गिर के जंगल में अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठाई थी। सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारियों के आधार  पर ही उन्होंने वन विभाग के खिलाफ गुजरात उच्च न्यायालय में अनेक याचिकाएँ लगाई थी। इससे पहले 13 जनवरी को महाराष्ट्र में जमीन घोटाले उजागर करने पर 39 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता सतीश शेट्टी की हत्या कर दी गई थी। वे तेलगाँव, लोनावला और पिम्परी-चीन्चवाड़ में जमीन घोटालों को सामने लाए थे। 13 जनवरी को सुबह जब वे सैर पर गए थे तो घर से करीब 7 किमी दूर उनपर तलवार सहित धारदार  हथियारों से हमला हुआ। कई जमीन घोटालों को उजागर करने वाले शेट्टी ने अपने लिए सुरक्षा की माँग भी की थी लेकिन इसके पहले ही उनकी जान ले ली गई।

अहमदाबाद के विश्राम लक्ष्मण डोडिया ने टोरेंट पॉवर से दिए गए अवैध कनेक्शन की जानकारी देने के लिए आवेदन किया था। उन्हें कोई सूचना नहीं मिली लेकिन 11 फरवरी को कम्पनी अधिकारियों  से मुलाकात के कुछ देर बाद वे मृत पाए गए। 14 फरवरी को बिहार के प्रसिद्ध कार्यकर्ता शशिधर मिश्रा की घर के बाहर अज्ञात बदमाशों ने गोली मार कर हत्या कर दी। वह स्थानीय लोक कल्याणकारी योजनाओं में गड़बड़ियों को उजागर कर रहे थे। अप्रैल में महाराष्ट्र के ग्रामीण स्कूलों की गड़बड़ियों की पोल खोलने वाले कार्यकर्ता विट्ठल गीते और उनके साथी ब्रजमोहन मिश्रा पर एक स्कूल संचालक के समर्थकों ने हमला कर दिया। इस हमले में विट्ठल की मौत हो गई। पुलिस के अनुसार स्कूल की अनियमितताओं की खबर अखबार में छपने के बाद दोनों के बीच विवाद बढ़ गया था। 22 मई को कोल्हापुर जिले के सामाजिक कार्यकर्ता दत्ता पाटिल का शव मिला। उनकी हत्या का एकमात्र कारण भ्रष्टाचार का खुलासा बताया गया।



महाराष्ट्र में खास आदेश
महाराष्ट्र सूचना के अधिकार का इस्तेमाल करने वाले कार्यकर्ताओं पर ज्यादा हमले हुए हैं। यहाँ कार्यकर्ताओं की शिकायतें थी कि पुलिस सुनवाई नहीं करती है। इन शिकायतों और बढ़ते हमलों को देखते हुए पुलिस महानिदेशक ने विशेष आदेश जारी कर निर्देश दिए थे कि ऐसे हमलों की सुनवाई हो और शिकायत दर्ज की जाए।

मप्र में चिंता
सामाजिक कार्यकर्ताओं पर बढ़ते हमलों के कारण प्रदेश के कार्यकतों भी चिंता में है। ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल के सदस्य अजय दुबे ने मप्र डीजीपी एसके राउत को ज्ञापन देकर आग्रह किया है कि प्रदेश में भी सूचना का अधिकार इस्तेमाल करने वाले कार्यकर्ताओं की सुरक्षा की योजना तैयार की जाए। अन्य कार्यकर्ता प्रशांत दुबे और रोली शिवहरे कहते हैं कि कार्यकर्ता इन हमलों से डरने वाले नहीं है। वे यूँ ही अपना काम जारी रखेंगे।

इन पर हुए हमले
-1 अप्रैल 2010 को महाराष्ट्र के जलगाँव जिले की पचोरा तालुका एडवोकेट अभय पाटिल पर जानलेवा हमला।
-लोक निर्माण विभाग के भ्रष्टाचार की जानकारी सूचना के अधिकार के तहत माँगने पर 14 जुलाई को पीडब्ल्यूडी कार्यालय के बाहर ही आरटीआई कार्यकर्ता अशोक कुमार शिंदे की पिटाई।
-16 मार्च को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में सुमेरा अब्दुलानी, नसीर जलाल व पत्रकारों के दल पर हमला, गाड़ी में तोड़फोड़।
- जम्मू कश्मीर सूचना का अधिकार आंदोलन के प्रमुख डॉ मुजफ्फर बट पर 27 फरवरी को बरनवार में सूचना का अधिकार कानून पर जागरूकता कार्यशाला के दौरान हमला।
- 12 जनवरी को दिल्ली में कार्यकर्ता अजय कुमार और साथियों पर राड, लाठी से हमला कर दिया।
- 8 जनवरी को मुबंई के चर्चगेट पर ओवल मैदान के सामने स्वस्तिक बिल्डिंग निवासी 65 वर्षीय बुजुर्ग कार्यकर्ता नयना कथपालिया को डराने के लिए सुबह 6.45 बजे घर के बाहर फायरिंग

1 comment:

  1. निश्चय ही ये हत्या देश के गणतंत्र ,प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति की हत्या है क्योकि पारदर्शिता व सत्य की लड़ाई लड़ रहे लोग इस देश के प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति से भी ज्यादा महत्वपूर्ण काम कर रहे होते हैं | ऐसे लोगों की सुरक्षा हर-हाल और हर कीमत पर की जानी चाहिए | बेहद शर्मनाक है इस तरह की घटना पूरे देश के लिए तथा पूरे इंसानियत के लिए |

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