Thursday, February 14, 2013

यह पेशेवर बेईमानी नहीं तो और क्या है ?


देश के सबसे बड़े घोटालों में से एक 2-जी स्पेक्ट्रम मामले में नया विवाद सामने आने के बाद सरकार ने सीबीआई के वकील एके सिंह को ताबड़तोड़ तरीके से हटा दिया है। उनके स्थान पर केके गोयल को नया वकील नियुक्त किया है। वकील बदलने की प्रक्रिया कोई नहीं है, लेकिन जिस कारण से सिंह को हटाया गया है , वह देश में जड़ तक  फैले भ्रष्टाचार और पेशेवर बेईमानी की ओर इशारा करता है।
 सिंह जिस थाली में खा रहे थे, उसी में छेद कर रहे थे। वे सिंह टूजी मामले में आरोपी संजय चंद्रा को ही कानूनी काट की सलाहें देते पकड़े गए। इसका बाकायदा टेप  मौजूद है। टेप कितना प्रामाणिक है, यह अभी तय होना है, लेकिन अगर वह सही है तो यह  हमारी न्याय प्रणाली के स्याह पक्ष को उजागर करने के लिए काफी है।
विवाद सीबीआई के अभियोजक एके सिंह और घोटाले के मुख्य अभियुक्तों में से एक यूनीटेक के प्रबंध निदेशक संजय चंद्रा के बीच इस कथित बातचीत का टेप सीबीआई के कार्यालय में पहुंचाया गया है। इस टेप में रिकार्ड बातचीत में कथित रूप से सीबीआई के अभियोजक एके सिंह कानूनी रणनीति को लेकर संजय चंद्रा को सलाह देते सुनाई दे रहे हैं।
मामले की गंभीरता को इसी बात से जाना जा सकता है कि इस टेप के सामने आने के बाद सीबीआई ने तत्काल सिंह को निकाल दिया है, जबकि संजय चंद्रा ने इन आरोपों का खंडन किया है। चंद्रा ने सफाई दी है कि वह 2-जी मामले के अभियोजक से कभी भी अदालत के बाहर नहीं मिले हैं, और न ही कभी फोन पर उनसे बात की है। चंद्रा का  कहना है कि टेप में सुनाई दे रही आवाज उनकी  नहीं है। उनके मुताबिक किसी ने जानबूझकर उनकी आवाज बनाकर रिकॉर्डिंग की है और सीबीआई को भेजी है।
चंद्रा वर्ष तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा के जरिए गलत तरीके से मोबाइल नेटवर्क लाइसेंस हासिल करने के लिए धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र रचने के आरोपों के तहत संजय चंद्रा अन्य प्रमुख आरोपियों के साथ वर्ष 2011 के दौरान लगभग आठ महीने जेल में बिता चुके हैं। अगर टेप पर यकीन करें तो यह संकेत खतरनाक है कि अभियोजक विपक्ष के साथ मिल कर केस को कमजोर करने में जुटा है। यह हमारी न्याय प्रणाली को सचेत करने जैसा मामला है, क्योंकि कई मामलों में मनचाहा फैसला न आने या मामला लंबा खिंच जाने पर अकसर ही वकीलों पर अविश्वास जाहिर कर दिया जाता है, लेकिन ऐसे मामले कभी सामने नहीं आए। जो कभी ऐसा हुआ भी तो ‘हिट एंड रन’ की तरह न्यायपालिका ने कठोर संदेश दिया है। हिट एंड रन मामले में प्रख्यात वकील आरके आनंद के साथ सर्वोच्च न्यायालय ने भी नरमी नहीं बरती थी। गौरतलब है कि आनंद को 1999 के बहुचर्चित बीएमडब्लू हिट एंड रन मामले में एक गवाह को प्रभावित करने के कारण न्यायालय की अवमानना का दोषी पाया गया था।
उच्चतम न्यायालय ने इससे पहले आर के आनंद को न्यायालय की अवमानना करने के कारण वरिष्ठ अधिवक्ता की पदवी से वंचित कर दिया था। इस हादसे में पूर्व नौसेनाध्यक्ष एस एम नंदा के पौत्र संजीव नंदा ने 10 जनवरी, 1999 की रात में लापरवाही से बीएमडब्लू कार चलाते हुए कई व्यक्तियों को कुचल दिया था। आनंद के अलावा एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता आईयू खान को न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया में बाधा डालने का दोषी ठहराते हुए उनके चार महीने तक अदालत में वकालत करने पर रोक लगा दी थी।
ताजा मामला और भी गंभीर है। यह देश के राजस्व और आर्थिक हानि से जुड़ा है। कैग ने  2001 में तय दर पर स्पेक्ट्रम बेचने के निर्णय से खजाने को 1.76 लाख करोड़ रुपए का नुकसान का आकलन किया है। हालांकि सीबीआई आश्वस्त है कि उसके द्वारा की गई विस्तृत जांच और एकत्र किए गए पुख्ता सबूतों के कारण इस टेप कांड से मामले की सुनवाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा। फिर भी अभियोजन और आरोपियों के बीच सांठगांठ के संकेत सीबीआई की मुसीबत बढ़ाने वाले साबित होंगे। प्रमुख विपक्षी दल भाजपा के साथ पूरा विपक्ष ही सीबीआई पर केंद्र सरकार के इशारों पर काम करने का आरोप लगाते रहे हैं। 2 जी घोटाले में जरा सी खामी उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाएगी। इस  प्रकरण से गंभरता से निपटना होगा।
 यह सबसे बड़ी जांच एजेंसी और न्याय तंत्र की पारदर्शिता और शुचिता पर प्रश्न है। 

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